जानिये, आखिर क्यों छलनी से देखा जाता है करवाचौथ के दिन चाँद?

हिंदू परंपरा के अंतर्गत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है। इस बार करवाचौथ 8 अक्टूबर, रविवार को मनाया जायेगा। इस दिन अमीर हो या गरीब, सभी महिलाएं छलनी में से चाँद को देख कर अपना व्रत खोलती है। व्रत की शाम छलनी की पूजा करके महिलाएं चांद को देखते हुए यह प्रार्थना करती हैं कि उनका सौभाग्य और सुहाग सलामत रहे।

लेकिन इस दिन चंद्रमा की ही पूजा क्यों की जाती है? और केवल छलनी से ही क्यों चाँद को देखा जाता है? इस परंपरा के पीछे एक पैराणिक कथा है।

माना जाता है के यह व्रत वीरवती नामक पतिव्रता स्त्री ने अपने विवाह के पहले साल रखा था। लेकिन भूख के कारण उसकी हालत खराब होने लगी। उसके भाईयों से उसकी स्थिति देखी नहीं जा रही थी। इसलिए सब भाइयों ने चांद निकलने से पहले ही एक पेड़ की ओट में छलनी के पीछे दीप रखकर बहन को कहा के चांद निकल आया है। बहन ने उनकी बातों में आ कर झूठा चांद देखकर व्रत खोल लिया। लेकिन इस कारण से वीरवती के पति की मृत्यु हो गई।

वीरवती अपने पति की मृत्यु की सूचना सुनकर व्याकुल हो उठी। तब उससे मालून पड़ा की उसके भाइयों ने जिसे चांद कहकर व्रत खोलवाया था वह चांद नहीं छलनी में चमकता दीप था। असली चांद को देखे बिना व्रत खोलने के दोष से उसके पति की मृत्यु हुई है। इसके बाद भी वीरवति ने अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने दिया और उसका शव सुरक्षित अपने पास रखा। अगले वर्ष करवाचौथ के दिन वीरवती ने फिरसे नियम पूर्वक व्रत रखा जिससे करवा माता प्रसन्न हुई और वीरवती के मृत पति को जीवनदान दिया।

छलनी से चाँद देखने की परंपरा

सुहागन स्त्रियां आज भी छलनी से इस लिए चाँद को देखती है। लेकिन वे स्वयं छलनी को पकड़ कर व्रत खोलती है ताकि कोई और छल से उनका व्रत न खुलवा सके। करवा चौथ में छलनी लेकर चांद को देखना यह भी सिखाता है कि पतिव्रत का पालन करते हुए किसी प्रकार का छल उसे प्रतिव्रत से डिगा न सके।

करवाचौथ में सबसे अहम करवा होता है। करवा का अर्थ होता है मिट्टी का बर्तन। इस व्रत में सुहागिन स्त्रियां करवा की पूजा करके करवा माता से प्रार्थना करती है कि उनका प्रेम अटूट हो और पति-पत्नी के बीच विश्वास का कच्चा धागा कमजोर न हो पाए। इसके लिए मिट्टी के बरतन को प्रतीक चिन्ह के रूप में प्रयोग किया जाता है, क्योंकि मिट्टी के बर्तन को ठोकर लग जाए तो चकनाचूर हो जाता है, फिर जुड़ नहीं पाता है। इसलिए पति-पत्नी को हमेशा एक दूसरे पे विश्वास होना चाहिए और प्रयास करना चाहिए के इस अटूट विश्वास को ठेस नहीं पहुंचे।




By: M Thakur on Saturday, October 7th, 2017

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