आखिर भारत के Rupay कार्ड से क्यों घबराया अमेरिकी MasterCard?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता के आने के बाद से ही पूरे देश भर में डिजिटलाइजेशन हो चुका है. रिसर्च के अनुसार एक साल में लगभग 6 लाख से भी अधिक डिजिटल कार्ड ट्रेन्ज़ेक्शन हो रहे हैं. इन सभी कार्ड ट्रेन्ज़ेक्शन में कार्ड कंपनियों का कमिशन 1% होता है. यानि इस हिसाब से देखा जाए तो हर साल देश में रुपे, वीसा और मास्टर कार्ड जैसे डिजिटल पेमेंट नेटवर्क का कुल मार्किट 6 हज़ार करोड रुपए के आंकड़े तक पहुँच चुका है. इन आंकड़ों से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत में आने वाले समय में कार्ड का लेन देन 90 लाख करोड रुपए तक पहुँच जाएगा.

ऐसे में सभी कार्ड कंपनियों का मुनाफा दुगुना हो जाएगा. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि अभी भारत में 102 करोड डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स हैं. जिनमे से करीब 50 करोड रुपए कार्ड्स हैं और बाकी अन्य वीसा और मास्टर कार्ड्स हैं. जिसके कारण विदेशी ख़ास कर अमेरिकी कार्ड कंपनियां काफी डरी हुई हैं. ख़बरों के अनुसार Rupay कार्ड्स साल 2012 में भारत में लांच किए गए थे और जून में इनका लेन देन शुरू कर दिया गया था.

गौरतलब है कि रुपे कार्ड्स हर पॉइंट ऑफ़ सेल और ऑनलाइन खरीदारी के लेन देन पर 90 पैसे कमीशन लेता है जबकि वीसा और मास्टर कार्ड की कमीशन 3 रुपए के करीब है. ऐसे में मोदी जी द्वारा रुपे कार्ड को बढ़ावा देने से विदेशी कार्ड कंपनियां लगातार नुक्सान झेल रही हैं. यदि ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब भारत में विदेशी कार्ड पूरी तरह से बंद हो जाएंगे. कार्ड्स के बारे में संपूर्ण जानकारी पाने के लिए नीचे दिया गया विडियो जरुर देखें…

देखें, RuPay से क्यों घबराया अमेरिकी Mastercard ?

देखें, RuPay से क्यों घबराया अमेरिकी Mastercard ?

Zee News ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಶುಕ್ರವಾರ, ನವೆಂಬರ್ 2, 2018

News Source

By: Kirti Kalra on Saturday, November 3rd, 2018