इस भारतीय प्रधानमन्त्री की वजह से पाकिस्तान में मारे गये थे कई RAW एजेंट्स! 

60 के दशक के अंत का समय भारत की सबसे बड़ी इंटेलिजेंस एजेंसी रॉ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था| इसका सबसे बड़ा कारण था इस दौर में इजराइल की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ RAW के बेहद करीबी सम्बन्ध बनना| और क्योंकि मोसाद संसार के सबसे मज़बूत और खतरनाक इंटेलिजेंस बॉडीज में से एक है, यहाँ रॉ के पास खुद को ताकतवर बनाने का सुनहरा अवसर था!

रॉ और मोसाद ने एक होने के बाद सबसे पहला जो बड़ा काम किया था वो था पाकिस्तान, चीन और नार्थ कोरिया के बीच के सैन्य संबंधों के सुराग ढूंढना| और इस पर मुहर लगी जब 1971 में पाकिस्तान के विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो नार्थ कोरिया के साथ सैन्य सम्बन्ध स्थापित करने प्योंगयांग पहुंचे|

रॉ की तेज़ नजर थी पाकिस्तान की परमाणु गतिविधियों पर 

इस दौर में इजराइल की चिंता का सबसे बड़ा कारण ये था कि पाकिस्तानी फ़ौज के अफसर लीबियन और ईरानियों को चीन और उत्तर कोरिया की मशीनरियां चलाने की ट्रेनिंग दे रहे थे| और ऐसे ही मुद्दों पर काम करते हुए रॉ और मोसाद का तालमेल अभी दुनिया के लिए एक राज ही था कि मोरारजी देसाई के कारण ये रिश्ते जगजाहिर हो गये!

और ऐसा हुआ 1977 में मोरारजी के प्रधानमन्त्री बनने के साथ| रॉ ने उस वक़्त उन्हें जिया उल हक प्रशासन के ज्यादा से ज्यादा परमाणु योग्यता हासिल करने के मंसूबों से अवगत करवा दिया था| इस समय सब यह जानते थे कि फ्रांस भी पाकिस्तान को एक प्लूटोनियम प्रोसेसिंग प्लांट चलाने में सहयोग कर रहा था| लेकिन उसका कहुता स्थित यूरेनियम एन्रिच्मेंट प्लांट अभी भी एक सीक्रेट ही था| और रॉ की नजर इसी प्लांट पर थी|

और जब मोरारजी देसाई के कारण रॉ-मोसाद के रिश्ते हुए जगजाहिर! 

रॉ ने 1977 में ‘ऑपरेशन कहुता’ चलाया और इसका मकसद पाकिस्तान की परमाणु ऊर्जा सम्बन्धी गतिविधियों को प्रभावित करना था| यह आज भी रॉ के द्वारा किये गये सबसे खतरनाक ओपेरेशनों में से एक माना जाता है| रॉ ने कहुता में पाकिस्तान की परमाणु हथियार लैब और इसके आस पास के इलाकों में अपने एजेंट डिप्लॉय कर दिए थे| वहां से कई महीनों तक वहां मौजूद वैज्ञानिकों पर भी नजर रखी गयी|

लेकिन, 1978 में जब रॉ कहुता लैब से सम्बंधित अति-महत्वपूर्ण प्लान और ब्लूप्रिंट इकठे कर चुकी थी, मोरारजी देसाई ने रॉ के इस मिशन को रुकवा दिया| मोरारजी प्रशासन ने न सिर्फ रॉ के द्वारा की गयी 10,000 डॉलर की मांग ठुकराई, बल्कि पाकिस्तान को भी रॉ की सारी गतिविधियों के बारे में सतर्क कर दिया|

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मोरारजी ने फ़ोन पर ही जिया उल हक से कहा –

“जनरल, मैं जनता हूँ कि तुम कहुता में क्या कर रहे हो| रॉ ने मुझे सारी डिटेल्स लाकर दी हैं|”

और इस तरह रॉ के पकिस्तान में एक्सपोज़ होने के आसार बन गये| इस सूचना के आधार पर ही पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने कहुता में कई रॉ एजेंट्स को मार गिराया| इसके बाद भारत को पाकिस्तान की परमाणु गतिविधियों के बारे में कभी भी कुछ पता नहीं चल पाया| वहां पर रॉ का सारा नेटवर्क भी तबाह हो गया और उसे शुरुआत से खडा करने में सालों लग गये!

सोर्स 

By: Sharma on Monday, February 26th, 2018