आम आदमी के खाते में 15 लाख आने को लेकर PM मोदी से पूछा गया सवाल, मिला ऐसा जवाब… 

2014 में जब लोकसभा के चुनाव होने को थे, हमेशा की तरह हर पार्टी और नेता ने कोई न कोई मुद्दा लोगों के सामने रखा और उस पर खुले मंच से बात भी की| इस दौरान भाजपा ने एक बहुत ही जरूरी मुद्दे पर अपने विचार रखे और वह मुद्दा था बाहर के देशों में हमारे लोगों की ब्लैक मनी का| और यह ऐसा मुद्दा है जिस पर इस से पहले किसी ने ज्यादा बात नहीं की|

लेकिन मोदी जी ने इस मुद्दे को पूरे देश के सामने रखा और आंकड़ों के साथ बात की| अगर आपको याद हो तो मोदी जी ने कहा था कि हमारा इतना पैसा बाहर है कि यदि उसे वापिस लाया जाए तो हर एक भारतीय के खाते में 15 लाख आ सकते हैं| और यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो काले धन को लाने को प्राथमिकता दी जाएगी|

और सरकार ने शुरुआत से ही इस तरफ जितना हो सका है प्रयास किए हैं|

RTI में पूछा गया खातों में कब आएँगे 15 लाख 

हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख आने के मामले पर RTI एक्टिविस्ट मोहन कुमार शर्मा ने मोदी जी और सरकार से एक सवाल किया| वर्ष 2016 में नोटबंदी की घोषणा किए जाने के लगभग 18 दिन के भीतर मोहन ने एक जनहित याचिका दायर की| इस याचिका में सवाल किया गया था कि हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख देने का जो वादा मोदी जी ने किया था, उसकी प्रक्रिया कबसे शुरू होगी|

इस मामले की सुनवाई में मोहन कुमार ने दलील दी कि इस मुद्दे पर न तो PMO से और न ही रिजर्व बैंक की तरफ से कोई विस्तृत जानकारी दी गई है| लेकिन फिर मुख्य सुचना अधिकारी आर के माथुर ने इसके जवाब में कहा –

‘पीएमओ की ओर से आवेदककर्ता को यह जानकारी दी गई कि उनकी ओर से आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी आरटीआई एक्ट के सेक्शन 2(एफ) के अंतर्गत सूचना की परिभाषा के दायरे में नहीं आती।’

आपको बता दें कि RTI के इस सेक्शन के अंतर्गत लगभग हर तरह की जानकारी डाटा के रूप में उपलब्ध रहती है| लेकिन ऐसा कोई भी दावा क़ानून या फिर सरकार की अथॉरिटी के अंतर्गत नहीं आता है|

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By: Sharma on Tuesday, April 24th, 2018