हिन्दुओं के उत्थान और पतन के इतिहास का प्रत्यक्ष गवाह: सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मन्दिर जो भारतीयों/हिन्दुओं के उत्थान और पतन के इतिहास का प्रत्यक्ष गवाह रहा है। अत्यंत वैभवशाली होने के कारण इतिहास में कई बार यह मंदिर तोड़ा तथा पुनर्निर्मित किया गया है ! सोमनाथ का मन्दिर बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है !

सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार दक्षप्रजापति के श्राप से बचने के लिए,सोमदेव (चंद्रदेव) ने भगवान शिव की आराधना की । अंततः शिव प्रसन्न हुए और सोम(चंद्र) के श्राप का निवारण किया। सोम के कष्ट को दूर करने वाले प्रभु शिव की यहाँ पर स्थापना स्वयं सोमदेव ने की थी ! इसी कारण इस तीर्थ का नाम”सोमनाथ” पड़ा ।

पौराणिक कथाओं के अनुसार सोमनाथ से 1-2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भालका नामक तीर्थस्थल पर जब वासुदेव कृष्ण विश्राम

कर रहे थे तभी एक हिरन का पीछा करते हुए उस ओर पहुंचे बहेलिया ने उनके पैर में पद्म को देखा और उसे मृग की आँख समझकर उसमें बाण मार दिया ! भगवान् कृष्ण ने बहेलिया के बाण से घायल होकर अपना पार्थिव शरीर त्यागा था !

सोमनाथ के मंदिर के पौराणिक महत्व को देखकर ,राजा नागभट्ट के द्वारा तीसरी बार  815 ईसवी में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था ये मंदिर अपनी सुन्दरता, आकुल धन सम्पति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्द था !मन्दिर के आकुल धन संपदा के बारे में सुनकर ,1024 ईसवी में मोहम्मद गजनवी ने सोमनाथ के मन्दिर पर अपने 5000 सैनिकों के

साथ आक्रमण कर दिया ! उस समय मन्दिर में लगभग 50000 त्रिशुल धारी शिवभक्त मन्दिर में मौजूद थे मगर भक्तों ने गजनवी की सेना

से युद्ध करने के बजाय,अपने सामर्थ्य पर विश्वास करने के बजाय, दैवीय शक्तियों पर विश्वास किया ! भक्तजन शिव से चमत्कार की आश में हाथ जोड़कर उनसे प्रार्थना करते है और गजनवी ने न सिर्फ सोमनाथ मन्दिर को लुटा बल्कि सभी श्रद्धालुओं की निर्ममता से हत्या कर दी !

गुजरात के राजा भेम और मालवा के राजा भोज ने सोमनाथ के मन्दिर का पुनः जीर्णोद्धार किया ! 13वीं सदी में जब गुजरात पर दिल्ली सल्तनत का राज्य था तब मुस्लिम शासक अलाउदीन खिलज़ी के द्वारा इस मंदिर को पुन: तोडा गया ! बाद में ओरंगजेब ने 1706 इस मंदिर को फिर तोड़ा था !

भारत की स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में सोमनाथ मन्दिर का पुन: जीर्णोद्धार का कार्य प्रारम्भ हुआ ! भारत के प्रथम राष्ट्रपति डा.राजेन्द्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को अपनी प्राण प्रतिष्ठा देकर ज्योतिर्लिंग को मन्दिर में रखा !

1962 में सोमनाथ के मन्दिर के निर्माण का कार्य पूर्ण हुआ ! इस मंदिर के निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल ने प्रमुख भूमिका निभाई थी ! आज सोमनाथ मन्दिर में दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते है !

सोमनाथ मंदिर के दक्षिण में एक स्तंभ स्थित है। जिसपर एक तीर रखकर संकेत किया गया है कि सोमनाथ मंदिर और दक्षिण ध्रुव के बीच में प्रथ्वी का कोई भाग नहीं है।यद्यपि सोमनाथ का मन्दिर कई बार तोड़ा गया और उसे पुन: भव्य स्वरुप प्रदान किया जाता रहा ! लेकिन सोमनाथ मन्दिर का ज्योतिर्लिंग आज भी वही है ! सोमनाथ का मन्दिर बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है !

सोमनाथ मन्दिर से लगभग 200 किलोमीटर दूर वासुदेव कृष्ण द्वारा बसाई गयी द्वारिका नगरी है ! द्वारिकाधीश के दर्शन के लिए प्रतिदिन देश विदेश से हजारों श्रद्धालु आते है ! श्रद्धालु जन गोमती नदी में स्नान कर पुन्य अर्जित करते है !

सोमनाथ मन्दिर के आसपास 10 किलोमीटर की परिधि में लगभग 42 पौराणिक हिन्दू मन्दिर है ! मंदिरों के अलावा यहां तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। इस त्रिवेणी स्नान का विशेष महत्व है।

By: K Bharat on Tuesday, November 1st, 2016

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