यात्रियों पर आरोप लगाने से पहले रेल विभाग अपने वेंडरों के स्टाफ की ये करतूत भी देखे

बिहार: बिहार के मुजफ्फरपुर रेलवे डिपार्टमेंट का दावा है कि पिछले एक वित्तीय वर्ष में यात्री उनके 14 करोड़ रुपए के कंबल, चादर, तौलिये और तकिये उठा कर ले गए हैं. जबकि हाल ही में हुए खुलासे के बारे में जानने के बाद आप भी समझ जाएंगे कि आखिर यह सारा पैसा और सामान जा कहा रहा हैं. बता दें कि जिसे रेलवे विभाग के अधिकारी यात्रियों की चोरी बता रहे हैं उसकी हकीक़त कुछ और ही है. हाल ही में हुए न्यूज़ भास्कर के खुलासे के बाद यह बात साबित हुई है कि रेलवे का यह सारा सामान यात्री नहीं बल्कि खुद एसी कोच अटेंडेंट चुरा रहे हैं और उन्हें सस्ते में बेच कर चोरी का इलज़ाम यात्रियों पर लगा देते हैं.

भास्कर न्यूज़ सीक्रेट सर्वे के अनुसार सरयू-यमुना, टाटा छपरा और रांची-जयनगर एक्सप्रेस के एसी कोच अटेंडेंट केवल 400 रुपए में यह सब कंबल चुरा कर बेचते हुए पाए गए हैं. इस खुलासे में पाया गया कि 9 दिसंबर को समस्तीपुर रेलवे स्टेशन के एसी-2 कोच के अटेंडेंट ने बिना पूरी डील के ही दो कंबलों को 800 रुपए में बेच दिया था जबकि 11 दिसंबर को मुजफ्फरपुर के भगवानपुर रेलवे स्टेशन पर गाड़ी के पिछले दरवाज़े से एक हज़ार रुपए में तीन कंबल एक प्रेस रिपोर्टर को बेचे गए.

वहीँ बात रांची की करें तो यहाँ के रेलवे कोच अटेंडेंट ने 6 कंबलों की डील 2400 रुपए में की इस डील के लिए उन्होंने रिपोर्टर को 12 दिसंबर के दिन स्टेशन पर बुलाया था. इस बीच एक घंटे की लंबी बातचीत के बाद डील पूरी की गई और फिर सौदा होने के बाद सफेद और नीले रंग के दो बोरो में 6 कंबल भर कर बेच दिए गए. रेलवे विभाग की ऐसी गैर जिम्मेदाराना हरकत देख कर लोगों का प्रशासन पर से विश्वास उठता जा रहा है. वहीँ यह लोग अपने ही डिपार्टमेंट की चोरी को यात्रियों के नाम लगा कर लाभ कमाने में लगे हुए हैं.

मुजफ्फरपुर में सौदा होने के बाद की बातचीत देख कर आप सब भी दंग रह जाएंगे. बता दें कि यह घटना 11 दिसंबर को दोपहर 1 बजे की है. इसमें टाटा से चल कर छपरा तक जाने वाली ट्रेन का नंबर 18181 है जोकि प्लेटफार्म तीन पर आ कर रूकती है. तभी भास्कर न्यूज़ की रिपोर्टिंग टीम कोच बी-1 में चढ़ती है

रिपोर्टर(अटेंडेंट से): क्या कंबल मिलेगा भाई साहब?
अटेंडेंट: जी, कितने चाहिए?

रिपोर्टर: फिलहाल तो 5 कंबल की जरूरत है
अटेंडेंट: दो का हो जाएगा लेकिन 1000 रुपया लगेगा?

रिपोर्टर(800 रुपए देते हुए): दो कंबल ही दे दो अभी पैसे इतने ही हैं मेरे पास.
अटेंडेंट: टीक है अगले स्टेशन पर देता हूँ.

अगले स्टेशन पर पहुँच कर डिब्बे का शटर खोलते हुए अटेंडेंट रिपोर्टर को कंबल पकड़ा देता है.

समस्तीपुर स्टेशन 9 दिसंबर, समय दोपहर के 2:30 बजे

समस्तीपुर के प्लेटफार्म नंबर 3 पर जयनगर से अमृतसर वाली ट्रेन 146४९ सरयू-यमुना एक्सप्रेस आ कर रूकती है तभी भास्कर न्यूज़ की रिपोर्टर टीम एबी-1 में चढ़ती है और कोच के अटेंडेंट से बात करती है-

रिपोर्टर: वीरजी कंबल मिलेगा?
अटेंडेंट: कौन से कोच में रिजर्वेशन है आपका?

रिपोर्टर: मेरा कोई रिजर्वेशन नहीं है.
अटेंडेंट: ठीक है, कितने कंबल चाहिए आपको?

रिपोर्टर: मुझे 5 कंबल चाहिए थे.
अटेंडेंट: पांच तो नहीं लेकिन दो दे सकता हूँ.

रिपोर्टर: ठीक है वीरजी दो ही दे दीजिये लेकिन पैसे कितने लगेंगे?
अटेंडेंट हर कंबल का रेट 500-500 रुपए है.

रिपोर्टर(1000 रुपए पकड़ते हुए): इतने में तीन कंबल दे दो आप
अटेंडेंट(एसी कोच का शटर दिखाते हुए) उधर से आकर ले जाओ.

इसके बाद रिपोर्टर शटर के पास जाता है तो वह अटेंडेंट उसे कंबल थमा देता है.

भास्कर ने ऐसा ही खुलासा रांची-जयनगर एक्सप्रेस और कईं अन्य जगहों पर किया. बता दें कि ट्रेन से कंबल गायब होने की पूरी ज़िम्मेदारी अटेंडेंट की होती है. ज्यादातर यात्री सामान ले जाते हैं लेकिन अब खुद अटेंडेंट ही इसको अपना व्यापर बना रहे हैं. नए नियमों के तहत अब यदि कोई कंबल, तकिया, तौलिया आदि गायब होने पर पकड़ा जाता है तो उसे 75% जुर्माना लगाया जाएगा.

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By: Staff on Monday, December 17th, 2018