बल्लेबाज़ के ज़ीरो पर आउट होने को ‘डक’ क्यों बोलते हैं? ये सवाल क्रिकेट के इतिहास जितना ही पुराना है!

दुर्भाग्य से एक बैट्समैन जब शून्य पर चलता बनता है, तो हम उसकी खिसियाहट को ‘डक लग गयी’ कहकर और क्यों बढ़ाते है?

ये सवाल उन ज़बरदस्त उत्सुकताओं में से एक है, जो हम सबको कभी न कभी होती जरूर हैं| पर फिर मैच के जोश में हम माथापच्ची करना छोड़ देते है| जवाब मिलता नहीं और सवाल ज्यों का त्यों बना रहता है| तो बात ये है कि कोई भी बल्लेबाज़ ‘डक’ से सामना नहीं चाहता, और हर एक क्रिकेट फैन का ये पसंदीदा प्रश्न है!

चलिए आज आपको बताये देते हैं कि ये ग़ज़ब की टर्म इस्तेमाल में कब और कैसे आयी:

तो बात पीछे जाती है साल 1866 के दौर में| प्रिंस ऑफ़ वेल्स, जो आगे चलकर एडवर्ड 7वां बना, ने एक मैच में शून्य रन बनाये| इस खबर को छापते हुए उस समय के एक शीर्ष समाचार पत्र ने लिखा, “The Prince retired to the royal pavilion on a duck’s egg.” हालांकि ज़ीरो पर आउट होने के लिए ‘बत्तख का अंडा’ टर्म सम्भवत: उसकी ओवल शेप के चलते इस्तेमाल की गयी थी, आगे चलकर हमने इस में से सिर्फ ‘डक’ निकालकर रख लिया|

इसके बाद, सबसे पहली ओफिशिअल ‘डक’ टेस्ट क्रिकेट में 1877 में दर्ज़ की गयी| तो हम कह सकते हैं कि ऐसा हुए एक शताब्दी हो गयी है|

आगे चलकर इस टर्म को और अधिक रोचक बना दिया गया| जैसे कि कोई बल्लेबाज़ जब पहली ही गेंद पर आउट हो जाए, तो उसे ‘गोल्डन डक’ कहा जाता है| और ‘पेअर ऑफ़ डक्स’ टर्म इस्तेमाल की जाती है जब कोई खिलाड़ी टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शुन्य पर ही आउट हो जाए| और भगवान् न करे कोई बल्लेबाज़ दोनों पारियों में पहली पहली ही गेंद पर आउट हो जाए, तो इसे ‘किंग पेअर’ कहा जाता है|

तो ऐसे जन्म हुआ एक साधारण लेकिन बहुत ही फेमस क्रिकेट टर्म का, जिसके साथ नाम जुड़ने को बल्लेबाज़ किसी बड़ी बेइज्जती जैसे देखते हैं| बाकी ये वीडियो देखकर इस बारे में अपना ज्ञान बढाईये:




By: Sharma on Wednesday, December 6th, 2017

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