40 सालों बाद मिले हिंदू-मुस्लिम, एक बना मैनेजर तो दूसरा ऑटो ड्राईवर, मिलते ही दोनों ने किया कुछ ऐसा कि

कहते  हैं दोस्ती इस दुनिया में सबसे पवित्र रिश्ता है. ऐसे में जिसको सच्चा दोस्त मिल जाए, उसे दुनिया में कभी किसी चीज़ की कमी नहीं रहती. अआपने दोस्ती के अनेकों किस्से और कहनियाँ सुनी होंगी. लेकिन आज हम आपको जो दोस्ती की गाथा बताने जा रहे हैं, उसे सुन कर आप भी भावुक हुए बिना नहीं रह पाएंगे. यह कहानी भले आपको एक फिल्म की स्टोरी प्रतीत होगी लेकिन यह एक सच्ची कहानी है. चितौडगढ़ के बैंक ऑफ़ बडौदा की ब्रांच में एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिससे हर कोई दंग रह गया.

बैंक के मेनेजर  को एक ऑटो ड्राईवर के साथ गले लगते देख पूरा स्टाफ आश्चर्यचकित रह गया था. दोनों की आँखों में ख़ुशी के आंसू साफ़ झलक रहे थे. यह दोनों कोई और नहीं बल्कि बचपन के बिछड़े दोस्त थे जिनका मिलन आज 40 वर्षों के बाद हुआ था. आज भी दोनों के दिलों में दोस्ती जिन्दा थी और उनकी बीतीं यादें उन्हें भावुक कर रही थी. चलिए जानते हैं आखिर यह दोनों दोस्त कौन थे और इनके मिलन की कहानी आखिर क्या थी.

कुछ ऐसे शुरू हुई थी इनकी कहानी

राजस्थान के चितौडगढ़ के एक सैनिक स्कूल में चालीस साल पहले अनुज के पिता कन्हैयालाल पोरवाल अध्यापक थे. वहीँ दूसरी तरफ पीर मोहम्मद के पिता फ़तेह मोहम्मद एक इलेक्ट्रीशियन थे. शुरू से ही दोनों परिवारों के बीच में अच्छी दोस्ती थी इसलिए हर दुःख सुख में दोनों के घरवाले एक दुसरे घर आते-जाते थे. जब भी ईद का त्यौहार आता तो कन्हैयालाल पोरवाल फ़तेह मोहम्मद के घर की मिठाईयां और सेवईयां खाने जाता. और अगर दीपावली आती तो फ़तेह मोहम्मद कन्हैयालाल के घर पटाखे जलाने जाता. ऐसे में दोनों के बेटे अनुज और पीर मोहम्मद भी जिगरी दोस्त बन चुके थे. समय बीतता चला गया और एक दिन फ़तेह मोहम्मद को ड्यूटी पर ही दिल का दौरा पड़ गया. जिसके बाद उनकी वहीँ मृत्यु हो गई. वहीँ दूसरी और कन्हैयालाल का स्कूल से तबादला हो गया और वह उदयपुर अपने परिवार समेत बस गए.

40 साल बाद मिले दो बिछड़े यार

साल बीते लेकिन अनुज और पीर मोहम्मद के बीच में संपर्क का कोई साधन नहीं रहा. समय की मार से और पिता की कमी से पीर मोहम्मद को ऑटो चलाना पड़ा जबकि अनुज बैंक ऑफ़ बडौदा की ब्रांच में मैनेजर नियुक्त किए गए. शनिवार बैंक पहुंचे पीर मोहम्मद को सामने खड़ा देख कर अनुज ने उसे गले से लगा लिया और दोनों की आँखों से खुशियों का सैलाब छलक पड़ा. अनुज ने पीर मोहम्मद को बताया कि इतने सालों के बाद भी पोरवाल परिवार मोहम्मद परिवार को भुला नहीं पाया है.

ग्राहक अकरम ने मिलवाया दोनों को

काफी सालों बाद अनुज चितौडगढ़ के बीओबी सेंती में ब्रांच मैनेजर की पोस्ट पर नियुक्त किए. यहाँ उन्हें अकरम अली नाम का एक ग्राहक मिला जिसे उन्होंने पीर मोहम्मद के बारे में बताया. अकरम ने तब अनुज को वादा किया कि वह एक दिन दोनों दोस्तों को मिलवा देगा. लेकिन फ़तेह मोहम्मद की मौत के बाद उनके परिवार को तलाशना आसान नहीं था. इसी बीच एक दिन अकरम का मिलना सैनिक स्कूल के रिटायर कर्मचारी देवीलाल से हुआ. वहां उसे पता चला कि पीर मोहम्मद का परिवार इन दिनों शहर की क़स्बा चौकी के पास रहता है. अकरम ने समय ना गंवाते हुए वहां पहुंचना ठीक समझा और पीर मोहम्मद के मिलते ही अनुज के साथ उसकी भेंट करवा दी. दोनों की दोस्ती ने यह बात साबित कर दिखाई कि रिश्ते और प्यार किसी धरम के मोहताज़ नहीं हो सकते.

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By: Staff on Monday, December 24th, 2018