बड़ा खुलासा: 2019 में क्यों बीजेपी समर्थक ही बीजेपी को हराएंगे?

थोड़े से समय में ही जिस तरह भाजपा एक बेहद मजबूत और लोकप्रीय पार्टी बनकर निकली है, वह अपने आप में अभूतपूर्व है| और इसका काफी हद तक श्रेय प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को जाता है| और जैसी अभी प्रत्यक्ष स्थिति है, उसके मुताबिक इस पार्टी को निर्विरोध 2019 में अगले पांच वर्षों के लिए सत्ता संभालनी चाहिए|

लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर जो हो रहा है या होने के आसार बनते दिखाई देते हैं, तो फिर यहाँ ऐसा कुछ हो सकता है जिसके बारे में अभी शायद कोई सोच भी न रहा हो| और भाजपा के इतिहास को देखें तो यह हमेशा से ही उसकी विडंबना रही है कि जब उसे विरोधियों से भी कोई खौफ़ नहीं होता, ऐन वक़्त पर उसके अपने ही उसकी नाव डुबो जाते हैं!

साल 2004 इसका सबसे बड़ा उदाहरण है|

तो क्या इस बार भी इतिहास दोहराएंगे भाजपा समर्थक? 

इस प्रश्न का विस्तृत रूप यह है – क्या साल 2004 के आम चुनावों की तरह विरोधियों के भटकाने से भाजपा के अपने ही लोग 2019 में भी अपनी पार्टी को हरवाएंगे?

यदि आपको याद हो तो 2003 में अटल सरकार की लोकप्रियता ठीक वैसी ही थी जैसी आज 2018 में मोदी सरकार की है| तकनीकी रूप से समझें तो आज के जैसे ही उस वक़्त भी अटल जी की वजह कांग्रेस वैसे ही सकते में थी जैसी अभी मोदी जी की लोकप्रियता की वजह से है| उसे सूझता नहीं था कि कैसे अटल जी का किला भेदा जाए, जैसे आज मोदी जी के सामने विपक्ष की कोई रणनीति काम करती नहीं दिखती|

लेकिन, फिर वह पुराना दांव कांग्रेस और विपक्ष के काम आया, जिसमे उसने दुष्प्रचार करके लोगों को सरकार के खिलाफ इतना भड़काया कि एक साल से कम समय में ही स्थिति बदल गई| ठीक वैसे ही जैसे आज भी झूठी ख़बरों के माध्यम से सरकार के खिलाफ रोष को बढ़ावा दिया जा रहा है| जैसे हर हिंसा और बलात्कार की घटना को हिंदुत्व से जोड़कर नफरत फैलाई जा रही है|

अटल जी के समय में भी विपक्ष ने कभी कश्मीर, कभी व्यापार कभी  दलितों और कभी सरकारी कर्मचारियों को लेकर लोगों को भड़काया| और इस दुष्प्रचार में इतना और कोई नहीं बहा जितने खुद भाजपा समर्थक बहे थे| वे विरोधियों की चालों में आकर ऐसी गलती कर गए कि भाजपा को उस चुनाव में करारी शिकस्त मिली| सबसे ज्यादा दुःख की बात ये रही कि इसमें विपक्ष को कुछ ख़ास नहीं करना पड़ा, क्योंकि बहक कर खुद भाजपा समर्थक ही दीमक का काम कर गए|

और इस वक़्त भी देश में ठीक 2003 जैसा माहौल है| यदि अभी भाजपा समर्थक विपक्ष की चालों को नहीं समझ पाए, तो फिर वे खुद ही वो कर बैठेंगे जो विरोधी करना चाहते हैं|

By: Sharma on Thursday, April 19th, 2018