JNU में ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे’, आया ऐसा नया नियम! 

पिछले काफी समय से JNU लगातार विवादों में रहा है| विश्वविद्यालय प्रशासन को खासी माथापच्ची करनी पड़ी है| लेकिन अब उसने ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे’ का फार्मूला अपना लिया है!

आजकल चल रहे attendance के झगडे को लेकर अब JNU प्रशासन ने सभी स्टूडेंट्स के लिए 75% attendance जरूरी कर दी है, यदि वे फाइनल परीक्षा में बैठना चाहते हैं! प्रशासन इसको लेकर काफी सख्त है और केवल वे ही विद्यार्थी कुछ ढील की उम्मीद रख सकते हैं जिनके पास मेडिकल सर्टिफिकेट हो|

क्या कहता है ये JNU मैनेजमेंट द्वारा बनाया गया ये नया नियम? 

यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट रजिस्ट्रार सज्जन सिंह ने एक सर्कुलर निकाला है, जिसके अनुसार BA, BSc, MA, MSc, M Tech, M Phil, PhD  और अन्य पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्सों के विद्यार्थियों के सभी विद्यार्थियों के लिए अब 75% हाजिरी दर्ज करवाना आवश्यक रहेगा!

जो स्टूडेंट्स प्रमाणित मेडिकल सर्टिफिकेट लाने में सक्षम रहेंगेम उनके लिए इन मापदंडों को थोडा कम करते हुए 60% उपस्थिति की शर्त रखी गयी है| और M Phil और PhD के जो विद्यार्थी अपने प्रोजेक्ट वर्क को लेकर उपस्थित नहीं हो पायेंगे, उन्हें अपने सुपरवाईजर और दूसरी अथोरिटी को पहले ही इसकी सूचना देनी होगी|

स्टूडेंट यूनियन कर रही है इस नए नियम का विरोध 

JNU की स्टूडेंट यूनियन की लीडर गीता कुमारी इस विषय में JNU के vice-chancellor M Jagadesh Kumar से मिली हैं और उन्हें इस नए नियम के खिलाफ एक ज्ञापन भी सौंपा है| उनके मुताबिक़ इस नियम के लागू हो जाने से JNU की ‘अकादमिक आज़ादी’ खत्म हो जाएगी|

लेकिन प्रशासन इस बारे में किसी भी तरह की कोई ढील बरतने के मूड में नहीं है और इस बारे में कुमार ने भी अपना रुख कड़ा बना रखा है| और अगर ये नियम ऐसी ही कठोरता से लागु कर दिया जाए, तो उम्मीद है कि JNU में सभी तरह की अनियमितता समाप्त की जा सकेगी!

Source: Swarajyamag

By: Sharma on Friday, January 12th, 2018